हिंदुत्व जागने वाला है

हमने सबको सम्मान दिया, खामोशी से अपमान पिया।
सब हमे सताते रहते थे, फिर भी उन पर एहसान किया।kashmiri
सबने हमको तोड़ा कुचला, फिर भी सबको हम माफ किये।
ये देश सदा आबाद रहे, ये सोच के दिल को साफ किये।
जब आजादी की खातिर हमने, रंग बसंती ओढ़ लिए।
हँसते हँसते फाँसी झूले, और देश के ऊपर जान दिए।
कुछ हिन्दू थे कुछ मुस्लिम थे, कुछ सिख थे कुछ ईसाई थे।
भारत माँ पर मरने वाले, आपस मे सारे भाई थे।

लेकिन उनको अहसास नही, इसलिए पेड़ को काट दिया।
PM की कुर्सी के खातिर, उसने भारत को बांट दिया।
कहता वो हमको अपना था, लेकिन अक्सर दुत्कारा था।
जब भी हम उसके गले मिले, एक डंस सांप का मारा था।
उसे चैन नही लाहौर में था, इसलिए षटयन्त्र रचाया था।
भाड़े के टट्टू आगे कर, उनको बंदूक थमाया था।
कश्मीर के ऊपर वो हमला, मुगलो की सोच दिखाया था।
जैसे भाई ने भाई को, सत्ता के लिए मरवाया था।

कश्मीरी सारे डूब गए, जब उन आतंकी सायों में।
तब मदद मांगने आये वो, भारत की वीर फिजाओ में।
हम भला चाहते है सबका, उनको इसलिए बचाया था।
आतंक वहाँ से दूर किया, धरती का स्वर्ग बनाया था।
लेकिन सारे अहसानो को, वे पल भर में सब भूल गए।
जिसने उनकी इज्जत लूटी, उनकी झोली में झूल गए।
उन पाक परस्त आकाओ की, कठपुतली सब बन बैठे है।
वो मार रहे पत्थर हमको, साँपो की माफिक ऐंठे है।

वो भीख मिले हथियारों से, अब हमको आँख दिखाये है।
जिस सेना ने उन्हें बचाया था, उस पर बंदूक चलाये है।
लेकिंन इतना अब याद रखो, छल कपट भागने वाला है।
अब बच ना पाओगे गद्दारो, हिंदुत्व जागने वाला है।

……….संगम मिश्रा

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