Honesty of Kejriwal

हाथो में कुछ कागज लेकर, कुछ प्रश्न तुम्हारे होठों पर
दिल्ली को लेकर कुछ सपने, कर्तव्यपरायण राहों पर
लोगो की इन उम्मीदों पर, एक बाण धनुष से छोड़ दिया
कुछ पैसे कुर्सी की खातिर तुमने, हम सबके दिल को तोड़ दिया

देखा था पहली बार तुम्हे, बादल सा गरजते मंचो पर
एक आग उठी थी हम सब मे, एक किरण जगी थी मंचो पर
लेकिन उन सभी दिलो में तुमने, बीज जहर का घोल दिया
नजरो में गिरकर भी तुमने, कांग्रेसी हाथ से जोड़ लिया

हर बार हमे ये लगता था, कुछ लोग हमें बहकाते थे
कुछ लोग जिन्हें सब ना चाहे, तुम उनसे मिलने जाते थे
सब लोगो की उम्मीदों को, तुमने शीशे सा तोड़ दिया
गैरो के सजदे की खातिर, तुमने अपनो को छोड़ दिया

कुछ घाव दिया है हम सबको, जो अक्सर हमे रुलाते है
लोगो के ताने सुनकर भी, कुछ बोल नही हम पाते है
दिल्ली सौपे थे जिनको हम, वो दिल्ली को ही छोड़ दिया
कुछ झूठे सपनो की खातिर, दुश्मन से दिल को जोड़ लिया

एक गहरा घाव दिया तुमने, जो कभी पूज ना पायेगा
आंदोलन की कही लहरो से, कोई भगत सिंह सा आयेगा
ये धरा गगन कितना बोले, दिल उससे जोड़ न पाएंगे
चाहे वो कितना सच्चा हो, विश्वास नही कर पाएंगे

झूठी बाते कहकर तुमने, हम सबके मन को मोड़ दिया
सत्ता के नशे में झूम झूम, सेना पर तुमने वॉर किया
माथे पर इतने कलंक लिए, सच्चाई को भी छोड़ दिया
शेरो से लड़ने के खातिर, कुत्ते बिल्ली सँग जोड़ लिया

सत्ता में तुम जब आये थे, उम्मीद जगी थी हम सबको
दिल्ली भी लन्दन जैसी हो, ये आस जगी थी हम सबको
लेकिन अपने को जोकर का किरदार बना कर क्या पाया
जो शिलालेख बनता उसको अखबार बना कर क्या पाया

सत्ता को खातिर तुमने अब, भाई को भी ठुकराया है
दुर्योधन बन बैठे हो तुम, पांडव को दूर भगाया है
लेकिन अब दिन वो दूर नही, जब सत्ता भी ठुकरायेगी
जिस जिस को तुमने लुटा है, वो आइना तुम्हे दिखाएगी

सच्चाई पर चलते चलते, तुमने ये कैसी राह चुनी
जो चोर उच्चके नेता थे, उनकी बस तुमने बात सुनी,
अपनो को ठुकराकर तुमने, सरकार बना कर क्या पाया
जिसे भारतवर्ष बनाना था, उसे चोर बनाकर क्या पाया

कहर दिल्ली की गलियों में, बहुत तुमने है बरपाए
जमाने भर में जाकर अपनी, जमानत जब्त करवाये
जमाना तुमको एक सच्चा, बहुत मजबूत समझा था
मगर लोगो की उम्मीदों को, 10 जनपथ में लुटवाये

अपनों से नाता तोड़ा जब, वो वक्त बहुत दुखदाई था
हम सोच-सोच के रोते थे, निकला कितना हरजाई था
करके प्रपंच सारे तुमने, दिल सच्चाई का तोड़ दिया
गैरो को सँग लेकर तुमने, हमे बीच राह में छोड़ दिया

जिनको मंचो पर लाकर तुम, जब अपने बाण चलाते थे
इस राष्ट्रधर्म की सेवा में, उम्मीद नई दिखलाते थे
लेकिन इन अपने लोगो के, सारे सपनो को बेच दिया,
कुर्सी की खातिर तुमने अब, राहुल ममता की सेज लिया।

तुम्हें दिल्ली को पाना था, तो सबको साथ ले आये,
तुम्हे CM बनाने के लिए, कुछ जान लुटवाये
मगर अब देख कर गिरगिट सा चेहरा, सोचते है सब
जिन्हें दिल्ली बचानी थी, उसे वो बेच कर आये

तुम्हारे अक्स है झूठे है, तुम्हारा नाम झूठा है
करम दिल्ली के फूटे है, ख्वाब लोगो का टूटा है
अभी भी वक़्त है जागो, मेरे ऐं मुल्क के लोगो
जिसे श्रीराम समझे थे, वो रावण से भी झूठा है

…..संगम

1 thought on “Honesty of Kejriwal

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s