दिल्ली से हरिद्वार, ऋषिकेश और नीलकंठ महादेव की बाइक यात्रा

गोरखपुर से दिल्ली आए काफी समय हो गया था और इधर कोई बाइक से यात्रा भी नहीं हो पाई थी. बाइक से यात्रा करना हमेशा से ही मुझे रोमांचक लगता है क्योंकि इसमें कोई बंधन नहीं होता, जहां मर्जी किया वहां रुके जहां मर्जी किया वहां चल दिये.

मै काफी दिनों से बाइक पर कही घुमने जाने का सोच रहा था कि मेरे ऑफिस का एक लड़का राजन भरद्वाज भी साथ में चलने के लिए तैयार हो गया. हमने प्लान बनाया कि ऋषिकेश और नीलकंठ घुमने चलते हैं. राजन भारद्वाज के पास हीरो हौंडा कि स्पलेंडर बाइक है, तो हमने सोचा कि क्यों नहीं इसी बाइक से चला जाए.

जब हमारे ऑफिस वालो ने सुना कि हम एक ही स्पलेंडर पर दोनों लोग, ऋषिकेश-नीलकंठ की यात्रा पर जा रहे है तो सबने हमे डराया कि दो लोगो को लेकर 100CC की स्पलेंडर 600 किलोमीटर नही चल सकती क्योंकि 100CC की मोटरसाइकल सिर्फ शहरों में चलने के लिए बनी हुई है.

हमने सोचा कोई नहीं जो होगा देखा जाएगा और 2 जनवरी 2016 को सुबह-सुबह जाने का प्लान बनाया. कुछ जरुरी काम आ जाने कि वजह से हम लोग सुबह नहीं निकल पाए और 2 जनवरी 2016 शनिवार के दिन हम लोग दोपहर के 1:00 बजे अपने ऑफिस मोहन स्टेट नई दिल्ली से स्पलेंडर बाइक पर ऋषिकेश के लिए निकले.

मेरा वजन 85 किलो और राजन का वजन 65 किलो साथ में सामान होने कि वजह से स्पलेंडर हाईवे पर 70Km से उपर नही जा पा रही थी.

हमारा पहला स्टापेज गाजियाबाद से थोड़ा आगे हुआ जहां हमने लंच के नाम पर छोले और कुलचे खाएं. ठंडे पानी की बोतल साथ में रखे हुए थे और रास्ते में रुक-रुक कर पानी या जूस जो भी मिलता, पीते रहते जिससे शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाए रखें.

राजन भरद्वाज की यह पहली बाइक यात्रा थी और वह पीछे बैठा हुआ था जबकि मै बाइक चला रहा था इसलिए उसको थोड़ी दिक्कत और भी हो रही थी. दिल्ली से मुजफ्फरनगर तक रोड की कंडीशन बहुत अच्छी थी और उसके बाद जगह-जगह रोड बनने के कारण रास्ता खराब था. हर 50km चलने के बाद हम लोग रुककर चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, जूस या पानी पीते रहते थे, साथ ही शरीर को भी थोड़ा सा आराम मिलता रहता था.

DSC01301हर की पोड़ी पुल हरिद्वार

शाम के 7 बजे हम लोग हरिद्वार पहुंचे और सीधे हर की पौड़ी का रुख किया. करीब 1 घंटे तक हम लोग हर की पौड़ी पर गंगा जी के किनारे टहले और कुछ चाय नाश्ता किया. हर की पौड़ी का माहौल बहुत ही धार्मिक और शांतिपूर्ण था. थोडा समय वहा व्यतीत करने के बाद हमलोगों का अगला लक्ष्य ऋषिकेश पहुंचना था.

IMG_20160102_194321ऋषिकेश के तरफ बढ़ते हुए.

रात के 8 बजे हम हरिद्वार से ऋषिकेश के लिए निकले. बाइक की हेड लाइट इतनी नहीं थी कि अंधेरे में आसानी से तेज स्पीड पर गाड़ी चलाई जा सके, लेकिन किसी तरह से मैनेज करते हुए हम लोग रात के 9 बजे ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर पहुंचे.

P_20160102_202931त्रिवेणी घाट

त्रिवेणी घाट का नजारा अदभुत था, गंगा जी के किनारे बैठने पर मन को बहुत सुकून मिल रहा था, जिसकी हमें बहुत जरुरत भी थी क्योकि दिल्ली की भागा दौड़ी वाली जिंदगी से मन कुछ समय के लिए उचट गया था. थोड़ी देर त्रिवेणी घाट पर रुकने के बाद हम लोगों ने रात में रहने के लिए कमरे की तलाश करना शुरू किया. हमे त्रिवेणी घाट के बगल में एक गेस्ट हाउस में 400 रूपये में कमरा मिल गया. हमने कमरे के अंदर बैग को रखा और बाहर मार्केट में घूमने और खाना खाने के लिए निकल पड़े. थोड़ी देर घूमने के बाद एक रेस्टोरेंट में खाना खाएं और वापिस रूम में आकर सो गए हैं.

अगले दिन हम सुबह 7 बजे सो कर उठे और सीधे त्रिवेणी घाट पर नहाने के लिए पहुंचे. ठंड का मौसम था और गंगा जी का पानी एकदम ठंडा था. मैं जैसे ही पानी के अंदर कूदा, लगा कि पूरा शरीर जम सा गया है लेकिन थोड़ी देर नहाने के बाद मेरा शरीर उस ठंड के लिए अभ्यस्त हो गया.

मेरे निकलने के बाद राजन भी तेजी से पानी में कूदा और ठंड के कारण उतनी ही तेजी से वापस निकल कर आया. वहां से नहाने के बाद हमने कुछ चाय-नाश्ता किए और नीलकंठ मंदिर की तरफ चल दिए.

नीलकंठ महादेव मंदिर:- अत्यन्त प्रभावशाली यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहाँ भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्नान करते हैं।”

P_20160103_122941नीलकंठ मंदिर

हरिद्वार से नीलकंठ मंदिर तक का रास्ता करीब 32 किलोमीटर है, और रास्ता जगह-जगह से टूटा होने के कारण गाड़ी चलाने में दिक्कत हो रही थी. बीच में कई जगहे ऐसी भी आयी कि आगे एकदम खड़ी चढ़ाई थी इसलिए राजन को नीचे उतरकर धक्का भी लगाना पड़ रहा था.

P_20160103_114332_BFनीलकंठ का रास्ता

दोपहर के 12 बजे हम लोग नीलकंठ मंदिर पर पहुंचे. वहा पूजा के सामान बेचने के लिए कई सारी दुकानें थी. उन्हीं में से एक दुकान के पास हमने गाड़ी को खड़ा किया और पूजा के लिए फूल-पत्र लेकर भगवान महादेव के मंदिर में प्रवेश किए हैं. रविवार का दिन होने के नाते भीड़ ज्यादा नहीं थी जैसा कि शंकर जी को सोमवार के दिन ज्यादा लोग पूजते हैं, इसलिए हम लोग आराम से पूजा और दर्शन किए हैं. नीलकंठ से निकलने के बाद हम लोग शिवपुरी के लिए चल दिये.

P_20160103_123129पूजा करने के लिए जाते हुए

शिवपुरी रिवर राफ्टिंग के लिए प्रसिद्ध है, साथी प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक अच्छी जगह है, जहां आप आराम से गंगा जी के किनारे बैठ कर प्रकृति को निहारते हुए अपना समय व्यतीत कर सकते हैं. हम लोग बाइक को रोड से नीचे उतारकर बालू और पत्थरों के बीच चलाते हुए गंगा जी की धारा किनारे लाएं और और बाइक को कड़ी करने के बाद गंगा जी के किनारे बैठ गए.

P_20160103_142439गंगा जी के किनारे शिवपुरी

मौसम बहुत ही सुहाना था और साथ ही ठंडी हवाएं भी चल रही थी, इस मौसम में गंगा जी के किनारे शांति के साथ बैठकर बहुत अच्छा लग रहा था. हमने वहा पर थोड़ी देर बैठ कर नजरो को महसूस किया और फिर ऋषिकेश के लिए निकल पड़े. शाम के 4:00 बजे शिवपुरी से चलकर हमलोग ऋषिकेश को पहुंचे और लंच करने के बाद, दिल्ली के लिए निकले.

हरिद्वार से निकलते ही अँधेरा हो गया, साथ ही सभी लोग वीकेंड मनाकर वापस आ रहे थे इसलिए जगह जगह हैवी जाम भी मिलने लगा.

किसी तरह कभी रोड पर तो कभी कच्चे रास्तो पर चलते हुए, हमलोग आगे बढ़ रहे थे. बाइक की लाइट पर्याप्त नहीं थी और सामने से गाड़ी आने पर ऐसा लगता था की बिलकुल अँधेरा छा गया हो. ठण्ड बढ़ गयी थी और हमलोग आराम से चलते हुए मुजफ्फर नगर पहुंचे। वहां हमने एक ढाबे पर रुक कर कुछ चाय नाश्ता किया और फिर दिल्ली के लिए चल दिया।
थोड़ा आगे आने पर डिवाइडर वाला रास्ता शुरू हो गया जिससे गाड़ी चलाने में आसानी हो गयी. रात के करीब 11 बजे हमलोग घर पहुंचे और सबसे पहले घरवालों ने सुनाना शुरू किया क्योकि पूरा शरीर धूल-मिटटी से अटा पड़ा था और आँखे भी लाल हो रखी थी (धूल-मिटटी जाने के कारण). इस तरह हमारी दिल्ली- ऋषिकेश यात्रा की समाप्ति हो गयी

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बन्दर भी पोज़ देने लगा

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नीलकंठ की तरफ

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नीलकंठ की तरफ

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रास्ते में छोटा सा झरना

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गंगा जी के किनारे शिवपुरी

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गंगा जी के किनारे शिवपुरी

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गंगा जी के किनारे शिवपुरी

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गंगा जी के किनारे शिवपुरी

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गंगा जी के किनारे शिवपुरी

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गंगा जी के किनारे शिवपुरी

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गंगा जी के किनारे शिवपुरी

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मै और राजन गंगा जी के किनारे शिवपुरी

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गंगा जी के किनारे शिवपुरी

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लक्ष्मण झुला

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