JNU- देश को बांटने की कोशिश पर कविता

देश तोड़ने की बाते कर, अपना रंग दिखाया था
देशद्रोहियो की संगत में, अपना नाम लिखाया था
जी करता है गोली मारू, सत्ता के इन रंगों को
आग लगा दू वामपंथ के, नाजायज भिखमंगो को

JNU KI Khanai

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केजरीवाल की राजनीति को दिखाती कविता

डूब गयी थी अंधकार में, धुंधली सब तस्वीरे थी
कांग्रेस का राज्य था फैला, कठपुतली सी हीरे थी

तभी एक जुगनू सा चमका, लोकतंत्र के पाये में
लोगो को उम्मीद जगी इस, अन्ना के छोटे साये में
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सुकमा में नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुये CRPF के जवानों के ऊपर कविता

मन विचलित है तन विचलित है, विचलित मेरी भाषा है.
धीरे धीरे धूमिल होती, मोदी जी से अब आशा है.

जो सैनिक लाचार खड़े है, अनुसाशन की राहो में.
हाथ बंधे है जिनके अक्सर, नियमो की शाखाओं में.

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मोटरसाइकिल से दिल्ली – मंसूरी /धनोल्टी यात्रा

बाइक से यात्रा करना हमेशा से मुझे रोमांचित करता है, मुझे जब भी मौका मिलता है मैं कही न कही, कभी अकेले तो कभी किसी साथ घूमने के लिए निकल जाता हूँ। ऐसे ही एक दिन मई के महीने में ऑफिस मे बैठा था। दिल्ली में गर्मी खूब जोरो की पड़ रही थी और मेरा मन कही घूमने जाने के लिए ब्याकुल हो रहा था। मेरी पिछली बाइक यात्रा, दिल्ली से हाटु पीक नारकंडा की मार्च के महीने में हुई थी उसके बाद ऑफिस में ब्यस्त रहने के कारण कही जा नहीं पाया था।

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दिल्ली से हाटु पीक नारकंडा की बाइक यात्रा

मार्च के महीने में ऑफिस में बैठा कही घूमने जाने का सोच रहा था, तभी मेरी निगाह होली और उसके अगले दिन गुड फ्राइडे की छुट्टियों पर पड़ी। मैंने सोचा कि क्यों ना इस छुट्टियों का कही घूमने जाने में उपयोग किया जाये। मेरा घूमने जाने का विचार सुन के, एक सहकर्मी विनोद गुप्ता भी साथ जाने के लिए तैयार हो गया।

23 मार्च 2016 को ऑफिस का काम निपटा कर हम दोनों मेरी पल्सर 150CC पर शाम के 7 बजे मोहन एस्टेट मथुरा रोड दिल्ली से निकले।
लम्बा सप्ताहंत होने के कारण ऐसा लग रहा था कि हर कोई दिल्ली छोड़ के जा रहा है, चारो तरफ जाम लगा हुआ था। हम लोग भी किसी तरह, जाम में बचते-बचाते मुकरबा चौक बाईपास पर पहुचे।

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